Jun 09

आदमी की औकात

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।। आदमी की औकात ।।

एक माचिस की तिल्ली,
एक घी का लोटा,
लकड़ियों के ढेर पे
कुछ घण्टे में राख..
बस इतनी-सी है
!! आदमी की औकात !!

एक बूढ़ा बाप शाम को मर गया ,
अपनी सारी ज़िन्दगी ,
परिवार के नाम कर गया।
कहीं रोने की सुगबुगाहट  ,
तो कहीं फुसफुसाहट ,
..अरे जल्दी ले जाओ ..
.. कौन रोयेगा सारी रात…
बस इतनी-सी है
!! आदमी की औकात !!

मरने के बाद नीचे देखा ,
नज़ारे नज़र आ रहे थे,
मेरी मौत पे ..
कुछ लोग ज़बरदस्त,
तो कुछ ज़बरदस्ती
रो रहे थे।
.. नहीं रहा.. .. चला गया ..
… चार दिन करेंगे बात …
बस इतनी-सी है
!! आदमी की औकात !!

बेटा अच्छी तस्वीर बनवायेगा ,
सामने अगरबत्ती जलायेगा ,
खुश्बुदार फूलों की माला होगी ..
अखबार में अश्रुपूरित श्रद्धांजली होगी ..
बाद में उस तस्वीर पे ,
जाले भी कौन करेगा साफ़…
बस इतनी-सी है
!! आदमी की औकात !!

जिन्दगी भर ,
मेरा- मेरा- मेरा किया..
अपने लिए कम,
अपनों के लिए ज्यादा जीया …
कोई न देगा साथ…
जायेगा खाली हाथ….
क्या तिनका
ले जाने की भी
है हमारी औकात ???
बस इतनी-सी है
!! आदमी की औकात !!

….. हम चिंतन करें …..
क्या है हमारी औकात ???

।। आदमी की औकात ।।

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