Apr 23

Poem – गायब

 

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सावन की पुरवईया गायब ..
पोखर,ताल, तलईया गायब…!

कच्चे घर तो पक्के बन गये..
हर घर से आँगनइया गायब…!

सोहर, कजरी ,फगुवा भूले..
बिरहा नाच नचईया गायब…!

नोट निकलते ए टी म से….
पैसा , आना ,पईया गायब…!

दरवाजे पर कार खड़ी हैं..
बैल,, भैंस,,और गईया गायब…!

सुबह हुई तो चाय की चुस्की..
चना-चबैना ,लईया गायब…!

भाभी देख रही हैं रस्ता….
शहर गए थे, भईया गायब…।

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