Jan 17

Poem – अभी बाकी है

अभी बाकी है

दिल मे एक कशमकश अभी बाकी है
कही तेरे आने की उम्मीद अभी बाकी है |
चलें कभी कदम-दो कदम तेरे संग,
बस इतनी सी ख्वाहिश अभी बाकी है ||

इन अंधेरो से भरे रस्तो मे,
तेरी रोशनी की एक किरण अभी बाकी है |
मुरझा रहा है तेरा ये उपवन,
तेरी महक की एक कली अभी बाकी है ||

वीरान हो रहे इस आशिया मे,
तेरे कदमो की आहट अभी बाकी है |
बरसो की प्यासी इस धरा को,
तेरे नाम की एक बूँद अभी बाकी है ||

शांत निस्चल हो रहा ये समुंदर,
कही किसी कोने मे हिलोर एक अभी बाकी है |
अब भी चले आओ, कहीं देर न हो जाए,
क्योंकि,
पूरी होने को है ये ज़िंदगी,
बस तेरे लिए ही चन्द साँसे अभी बाकी है ||

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